पुरानी कहावत है, लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। लेकिन वास्तव में इस बात को सही साबित करने वाले लोगों की संख्या बहुत ही कम है। इन्ही लोगों में एक नाम है राजस्थान के नरेंद्र गिरवा का, जिन्हें आज लोग ‘पर्ल किंग’ के नाम से जानते हैं।
कभी जिंदगी की राहों में ठोकर खा चुके नरेंद्र ने जब सब कुछ हारते देखा, तब गलती से मिले एक छोटे से बिजनेस आइडिया ने उनकी किस्मत ही पलट दी। नरेंद्र का यह सफर आसान नहीं था। उन्हें बिजनेस में भारी नुकसान और बेरोजगारी का भी सामना करना पड़ा। पर आज नरेंद्र मोती बेचकर लाखों की कमाई कर रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं नरेंद्र सिंह गिरवा की असफलता से सफलता की कहानी के बारे में, जो देश के हजारों युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा दे सकती है।
8 साल स्टेशनरी की दुकान चलाई, पर बंद करना पड़ा बिजनेस
नरेंद्र गिरवा राजस्थान के जयपुर जिले के किशनगढ़ रेनवाल के रहने वाले हैं। ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद नरेंद्र ने अपने गांव में स्टेशनरी आटम्स की दुकान खोली, जिससे उनके घर का गुजारा चलने लगा। करीब 8 साल तक दुकान चलाने के बाद मकान मालिक के कहने पर उन्हें अपनी दुकान को खालली करना पड़ा।
दुकान खाली करने के बाद नरेंद्र ने दूसरी जगह दुकान खोली, लेकिन वहां ज्यादा ग्राहक उनसे नहीं जुड़ पाएं। इसके चलते कुछ ही महीनों में नरेंद्र को 4-5 लाख का घाटा हो गया। दुकान बंद होने के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया था। लेकिन इन मुश्किल के दिनों में नरेंद्र की पत्नी सिलाई का काम करके घर चलाने लगी।
यूट्यूब पर गलत टाइपिंग से मिला पर्ल फार्मिंग का बिजनेस आइडिया
नरेंद्र बताते हैं, कि उन्हें यूट्यूब पर गलत टाइपिंग से मोतियों का खजाना उनके हाथ लगा। एक दिन वो यूट्यूब पर खेती से संबंधित कुछ बाते सर्च कर रहे थे। इसी दौरान गलत टाइपिंग की वजह से पर्ल फार्मिग के कुछ वीडियोज उनके सामने आ गए। यहां से आइडिया लेकर उन्होंने साल 2015 में पर्ल फार्मिंग करना शुरु कर दिया।
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शुरुआत में हाथ लगी असफलता

पर्ल फार्मिंग (मोतियों की खेती) का Unique Business Idea मिलते ही नरेंद्र गिरवा केरल पहुंच गए। वहां उन्होंने मछुआरों से 500 सीप खरीदे और घर पर ही वाटर टैंक बनाकर मोतियों की खेती करना शुरु दिया।
हालांकि पर्ल फार्मिंग की सही ट्रेनिंग ना होने के कारण उनके 500 सीपियों में से सिर्फ 35 सीप से 70 मोती निकले। जिसके चलते पहली बार उन्हें इस बिजनेस में भी असफलता हाथ लगी।
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ट्रेनिंग ली और कमाया 2 लाख का मुनाफा
पहली बार मिली असफलता से नरेंद्र गिरवा निराश नहीं हुए। उन्होंने दोबारा रिसर्च की, तो उन्हें पता चला कि इस खेती को करने के लिए एक खास ट्रेनिंग की जरुरत होती है। जो कि भारत के केंद्रीय मीठा जलजीव पालन संस्थान (CIFA) भुवनेश्वर, उड़ीसा में दी जाती है।
यह जानने के बाद नरेंद्र कुमार गिरवा ने वहां जाकर ट्रेनिंग लेने का फासला लिया। 6000 रुपये की फीस देकर उन्होंने 5 दिन की ट्रेनिंग पूरी की, और घर आकर उन्होंने फिर से पर्ल फार्मिंग करना शुरु कर दिया। इस बाद उन्होंने 1000 सीपियां खरीदी। जिससे उन्हें करीब 2 लाख रुपये की कमाई हुई।
सालाना हो रही है करीब 8 लाख की आमदनी
वर्तमान में नरेंद्र गिरवा को एक खेप से 4000 मोतियों का प्रोडक्शन मिल रहा है, जिससे वो करीब 8 से 16 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। बात करें खर्चे की तो मार्केट में एक सीप की कीमत 30-60 रुपये के बीच होती हैं। एक सीप से उन्हें करीब 4 मोती प्राप्त होते हैं।
मोती की गुणवत्ता के आधार पर पर 200-400 रुपये प्रति नग बिकता है। नरेंद्र बताते हैं, कि पहले उन्होंने मोतियों को बेचने में काफी समस्या आती थी, लेकिन अब इस क्षेत्र में पहचान बनने के बाद बहुत सी कंपनियां खुद उनसे मोती खरीदती हैं।
बता दें कि नरेंद्र हर साल सितंबर-अक्टूबर के महीने में केरल जाकर 3,000 सीपी खरीदकर लाते हैं, और उन्हें अपने घर पर ही 25 टैंकों में स्टोर करते हैं। इसके बाद 15 से 18 महीनों तक इन सीपियों की देखभाल की जाती है। जिसके बाद करीब 2000 सीपियां ही मोती देने में सफल हो पाती हैं। इन 2000 सिपियों से नरेंद्र करीब 4000 मोतियों का प्रोडक्शन प्राप्त करते हैं।
Alkha Foundation के जरिए लोगों को दे रहे ट्रेनिंग
Pearl Farming के अनोखे बिजनेस आइडिया ने नरेंद्र गिरवा की जिंदगी बदल दी। आज वो खुद तो मोतियों की सफल खेती कर ही रहे हैं, साथ ही वो लोगों को भी इसके खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
नरेंद्र Alkha Foundation के जरिए लोगों को राजस्थान में ही मोतियों की खेती से जुड़ी ट्रेनिंग उपलब्ध करवा रहे हैं। अब तक वह 250 लोगों को पर्ल फार्मिंग की ट्रेनिंग दे चुके हैं। आज राजस्थान के अलावा हिमाचल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश,पंजाब, चंडीगढ़, सहित अन्य राज्यों को लोग इनसे से ट्रेनिंग लेकर पर्ल फार्मिंग कर रहे हैं।
प्रेरणा
नरेंद्र गिरवा की सफलता की कहानी आज के लाखों युवाओं को प्रेरणा दे रही है। उन्होंने ये साबित कर दिखाया है, कि अगर आपमें बार-बार उठ खड़ा होने की हिम्मत है, तो कोई भी परेशानी आपको गिरा नहीं सकती है।
उम्मीद है नरेंद्र गिरवा की प्रेरक कहानी पढ़कर आपमें भी कुछ कर दिखाने का जोश जगा हो। ऐसे में अगर आप भी कोई अनोखा बिजनेस करके खुद को सक्सेसफुल बनाना चाहते हैं, तो आप हमारे ब्लॉग पर पब्लिश अलग-अलग बिजनेस आइडियाज पढ़ सकते हैं।
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